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ऑप्शन

यह बैंक और उसके ग्राहकों के बीच किया गया एक अनुबंध होता है, जिसके अंतर्गत ग्राहक को किसी निर्दिष्ट अवधि के भीतर, पूर्वनिर्धारित मूल्य पर, किसी अंतर्निहित आस्ति की एक निश्चित मात्रा को खरीदने या बेचने का अधिकार प्राप्त होता है, किंतु ऐसा करने का कोई दायित्व नहीं होता।

प्रीमियम– वह मूल्य/राशि जो विकल्प के क्रेता द्वारा विक्रेता को खरीदने अथवा बेचने का अधिकार प्राप्त करने के लिए भुगतान की जाती है।

स्ट्राइक प्राइस– अंतर्निहित आस्ति का वह निर्दिष्ट/पूर्वनिर्धारित मूल्य, जिस पर ऑप्शन के अंतर्गत खरीद या बिक्री की जा सकती है।

यह फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट से भिन्न होता है, जिसमें दोनों पक्षों के लिए अनुबंध बाध्यकारी होता है।

किसी प्रतिभूति को बेचने का अधिकार पुट ऑप्शन कहलाता है, जबकि खरीदने का अधिकार कॉल ऑप्शन कहलाता है। ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है :

अंतर्निहित आस्तियों में प्रत्यक्ष निवेश किए बिना उनकी कीमतों में होने वाले परिवर्तनों से लाभ कमाने हेतु।

पूर्वनिर्धारित मूल्य पर, एक निश्चित अवधि के लिए, अंतर्निहित आस्तियों की खरीद या बिक्री के माध्यम से उनकी कीमतों में होने वाले उतारचढ़ाव से संरक्षण प्राप्त करने हेतु।

ऑप्शंस पर बाजार मूल्यांकन से उत्पन्न लाभ एवं हानियों को उपलब्ध तरल मार्जिन के सापेक्ष समायोजित किया जाता है। शुद्ध ऑप्शन मूल्य की गणना ऑप्शन के समापन मूल्य के आधार पर की जाती है और इसे अगले दिन लागू किया जाता है।

एक्सरसाइज़ डेट– वह तिथि जिस दिन ऑप्शन का वास्तव में प्रयोग किया जाता है।

यूरोपीय विकल्प– ऐसे विकल्प जिन्हें केवल समाप्ति तिथि पर ही प्रयोग किया जा सकता है। एनएसई में कारोबार किए जाने वाले सभी इंडेक्स विकल्प यूरोपीय विकल्प होते हैं।

इनदमनी ऑप्शन/आईटीएम– ऐसा ऑप्शन, जिसे यदि तुरंत प्रयोग किया जाए, तो लाभ प्राप्त होता है।

एटदमनी ऑप्शन/आईटीएम– ऐसा ऑप्शन, जिसे यदि तुरंत प्रयोग किया जाए, तो न लाभ होता है और न ही हानि।

आउटऑफदमनी ऑप्शन /ओटीएम– ऐसा ऑप्शन, जिसे यदि तुरंत प्रयोग किया जाए, तो हानि होती है।