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यूनियन बैंक राजभाषा कार्यान्वयन

राजभाषा परिचय: 

प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब संपूर्ण विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था तथा विदेशों में सूती वस्त्रों की मांग बढ़ रही थी. भारत के ओद्योगीकरण का मार्ग प्रशस्त हो रहा था. ब्रिटेन से सामान का आयात मुश्किल हो रहा था तथा युद्ध क्षेत्रों में फौज के लिए बड़ी मात्रा में ख़रीदारी की जा रही थी. निश्चित है यह समय भारत के कारोबारियों के लिए कारोबार के दृष्टिकोण से अच्छा समय था. ऐसे समय में कारोबार को बढ़ाने तथा देश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए आवश्यकता थी पैसे के सही नियोजन की. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना हमारे संस्थापक हमारे संस्थापक श्री सेठ सीताराम किशन दयाल पोद्दार जी के उसी दूरदर्शी नजरिए का परिणाम था. इन्होंने दिनांक 11 नवंबर, 1919 को अपने व्यवसायी दोस्तों के साथ मिलकर बैंक की नींव रखी. बैंक के इस शानदार सफर में भारतीय भाषा ने प्रारम्भ से अपना साथ निभाया है. इसका प्रमाण है 15 नवंबर 1919 को आयोजित निदेशक मण्डल की प्रथम बैठक के कार्यवृत्त पूर्णत: द्विभाषिक जारी किए गए थे. राजभाषा के दृष्टिकोण से यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है. 

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रधान कार्यालय का उद्घाटन दिनांक 21 जुलाई, 1921 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कर-कमलों से संपन्न हुआ. उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा था.

हमारी राष्ट्रीय गतिविधियों में दक्षता के साथ करोड़ों रुपयों के प्रबंधन के लिए एक बड़े बैंक को चलाने की योग्यता होनी चाहिए. यद्यपि हमारे पास ज्यादा संख्या में बैंक नहीं हैं, परंतु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि हम दक्षता के साथ करोड़ों रुपयों के प्रबंधन की योग्यता नहीं रखते हैं. 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

अपने एक शताब्दी से अधिक के सफर में राजभाषा के क्षेत्र में हमने अनगिनत उपलब्धियां हासिल की हैं तथा साथ ही साथ नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और यह साबित किया है कि बाज़ार एवं ग्राहक की भाषा की समझ हमारी कार्यप्रणाली का आधारस्तम्भ है. आधुनिकीकरण के इस दौर में राजभाषा कहीं से भी कमतर नहीं है. फिर चाहे वह ग्राहकों को उनकी स्रोत भाषा में सेवा प्रदान करना हो, कार्ययोजनाएँ, भारत सरकार एवं अन्य ख्याति प्राप्त संस्थाओं से प्राप्त पुरस्कार एवं सम्मान की बात हो हम सदैव अग्रणी हैं. वर्तमान में बैंक द्वारा 13 भाषाओं में एसएमएस की सुविधा प्रदान की जा रही है. इसके साथ ही बैंक द्वारा हिंदी में पासबुक आदि प्रिंट करने की सुविधा प्रदान की जा रही है.

केंद्रीय कार्यालय में राजभाषा कार्यान्वयन प्रभाग की स्थापना वर्ष 1973 में हुई. साथ ही सभी अंचल कार्यालयों एवं क्षेत्रीय कार्यालयों में वर्ष 1976 में राजभाषा कक्ष की स्थापना की गई. बैंक की प्रत्येक शाखा/कार्यालय/प्रशिक्षण महाविद्यालय/प्रशिक्षण केंद्र में राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन किया जा चुका है, इन समितियों में प्रत्येक तिमाही में नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाती हैं. वर्ष 1977 में यूनियन बैंक भारत का पहला राष्ट्रीयकृत बैंक बना, जिसने अपनी वार्षिक रिपोर्ट द्विभाषिक जारी की.

कंप्यूटरीकरण के दौर में जब बैंकिंग ने कागज के पन्नों से उठकर कीबोर्ड को आधार बनाकर माउस के पहियों पर दौड़ना शुरू किया, ऐसे में एपीएस टंकण, स्क्रिप्ट मैजिक सुविधा ने राजभाषा को न केवल जीवंत बनाए रखा बल्कि पासबुक प्रिंटिंग की सुविधा हिंदी में प्रदान कर अपनी उपस्थिति दर्ज की. विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में इस तरह की सुविधा प्रदान करने वाले हम अग्रणी बैंक थे. इनस्क्रिप्ट  की बोर्ड, माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लैंगवेज़ इनपुट टूल, एवं ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में अंतर्निहित फोनेटिक की बोर्ड के माध्यम से हिंदी टाइपिंग और भी सरल एवं सहज हो गई.

वर्ष 2008 में यूनियन बैंक प्रथम राष्ट्रीयकृत बैंक बना जिसने शत-प्रतिशत सीबीएस नेटवर्किंग हासिल की. बैंक द्वारा सीबीएस सिस्टम को अपनाने के उपरांत राजभाषा कार्यान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु मैन्युअल रिपोटिंग में आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु वर्ष 2010 से राजभाषा के लिए सीबीएस पैकेज को विकसित करना शुरू कर दिया. जून 2012 में हमारी यह मेहनत रंग लाई तथा हमारा इनहाउस विकसित सीआरएस पैकेज (कोर राजभाषा सोल्यूशन) शाखाओं एवं कार्यालयों के लिए लाइव कर दिया गया. इस सीआरएस पैकेज में न केवल रिपोर्टिंग होती है वरन इसमें ऑनलाइन पत्र प्रबंधन, धारा 3 (3) का रख रखाव, कर्मचारियों के हिंदी ज्ञान, 10(4) की सूची, 8(4) के आदेश, विभिन्न संस्थाओं से प्राप्त पुरस्कार, नराकास की रिपोर्ट, रबड़ की मुहरें, संदर्भ साहित्य, गृह पत्रिका, राभाकास की बैठक के कार्यवृत तथा पुस्तकालय प्रबंधन को ऑनलाइन ही देखा जा सकता है तथा केंद्रीय कार्यालय स्तर पर किसी भी शाखा के किसी भी दस्तावेजों के रखरखाव की जांच की जा सकती है. 

केंद्रीय कार्यालय द्वारा वर्ष 1976 से तिमाही आधार पर द्विभाषी गृह पत्रिका “यूनियन धारा” का प्रकाशन किया जा रहा है तथा जुलाई 2014 से केंद्रीय कार्यालय की हिंदी गृह पत्रिका “यूनियन सृजन” का भी प्रकाशन किया जा रहा है. 

केंद्रीय कार्यालय, अंचल कार्यालय, यूनियन बैंक ज्ञान केंद्र, अंचलीय ज्ञानार्जन केंद्र तथा क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा स्टाफ सदस्यों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से हिंदी पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है. हिंदी पखवाड़ा के दौरान स्टाफ सदस्यों हेतु प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. प्रतियोगिता के विजेताओं तथा वित्तीय वर्ष के दौरान श्रेष्ठ कार्यनिष्पादन करने वाले स्टाफ सदस्यों एवं शाखाओं को वार्षिक राजभाषा समारोह में पुरस्कृत किया जाता है.

वर्तमान में सभी क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा छमाही आधार पर गृह पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष सभी वर्टिकलों/विभागों, क्षेत्रीय कार्यालयों, अंचल कार्यालयों, यूनियन बैंक ज्ञान केन्द्रों तथा अंचलीय ज्ञानार्जन केन्द्रों द्वारा संदर्भ साहित्य का प्रकाशन किया जाता है.

गृह पत्रिका के अतिरिक्त अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित की जा रही हैं. वर्ष 2008-09 से प्रत्येक वर्ष बैंकिंग विषयों पर विविध आयाम पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है. इस शृंखला में अब तक कुल 14 पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं.

बैंकिंग विषयों पर अच्छी हिंदी पुस्तक उपलब्ध कराने तथा स्टाफ सदस्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यूनियन बैंक मौलिक हिंदी पुस्तक लेखन योजना की शुरुआत वर्ष 1993 में की गई. इस योजना के अंतर्गत अब तक कुल 5 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है. जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास एवं बैंक, भारतीय कृषि में उभरते अवसर एवं प्रवृतियाँ तथा वित्तीय नियोजन कब, क्यों और कैसे? पुस्तक को मौलिक पुस्तक लेखन योजना के अंतर्गत भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा क्रमश: प्रथम (वर्ष 2015), सर्वश्रेष्ठ (वर्ष 2016) तथा द्वितीय (वर्ष 2020) पुरस्कार प्राप्त हुआ है. 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर प्रत्येक वर्ष केंद्रीय कार्यालय, अंचल कार्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालय में महिला विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाता है. इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला स्टाफ सदस्यों को विशेष अनुभव कराते हुए बैंकिंग कार्यक्षेत्र में प्राथमिकता प्रदान कराना हैं तथा राजभाषा के माध्यम से बैंकिंग कार्यों को सम्पन्न करने में सुविधा प्रदान करना है.

वर्तमान में देश के 29 नगरों में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के संयोजक कार्यालय के रूप में हमारा बैंक अपनी भूमिका अदा कर रहा है.

बैंकिंग विषयों पर कार्टून पुस्तिका का प्रकाशन हमारी नवोन्मेषी पहल का सर्वोत्तम उदाहरण है. वित्तीय वर्ष 2008-09 से कार्टून पुस्तिका का प्रकाशन किया जा रहा है, अब तक कुल 24 कार्टून पुस्तिका का प्रकाशन किया जा चुका है. खुशहाली, राजभाषा के रंग कार्टूनिस्ट के संग तथा सावधानी हटी दुर्घटना घटी विषय पर लघु कार्टून फिल्में भी बनायी गयी है. 

भारत सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के अतिरिक्त स्टाफ सदस्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हमारे बैंक के स्तर पर कई प्रकार की प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही है, जिससे की स्टाफ सदस्य अपना अधिकतम राजभाषा के माध्यम से करने हेतु प्रोत्साहित होते है. बैंक की वेबसाइट पूर्णत: द्विभाषी है.