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राजभाषा संगोष्ठी-2025

अंचलीय ज्ञानार्जन केंद्र, गुरुग्राम में दिनांक 23 जुलाई, 2025 को “प्रभावी राजभाषा कार्यान्वयन एवं प्रचार-प्रसार हेतु उपाय” विषय पर कार्यपालकों हेतु राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री नितेश रंजन, कार्यपालक निदेशक ने की तथा श्री गिरीश चंद्र जोशी, महाप्रबंधक (मासं एवं राभा) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. सुश्री अंशुली आर्या, सचिव, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई. भारतीय परंपरा के अनुसरण में मंचासीन कार्यपालकों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर बैंक के वेबसाइट के राजभाषा के नवीकृत पेज का उद्घाटन किया गया. बैंक के आंतरिक राजभाषा पोर्टल के नवीन कलेवर का भी विमोचन किया गया. इस अवसर पर अपने रोजमरा के कार्यालयी काम-काज में हिन्दी में सर्वाधिक टिप्पण लिखने वाले कार्यपालकों तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के मापदण्डों पर श्रेष्ठ राजभाषा कार्यान्वयन करने वाले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के संयोजक कार्यालयों को मंचासीन कार्यपालकों द्वारा पुरस्कृत किया गया.

राजभाषा संगोष्ठी-2024


विश्व हिंदी दिवस-2024 के उपलक्ष्य में दिनांक 24 जनवरी, 2024 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई में ‘पारंपरिक ज्ञान से डिजिटल क्रांति के पथ पर अग्रसर हिंदी’ विषय पर कार्यपालकों हेतु विशेष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. अतिथि वक्ता के रूप में मो. युनूस ख़ान, वरिष्ठ उद्घोषक, आकाशवाणी, मुंबई उपस्थित रहे. अपने संबोधन में संगोष्ठी के विषय प्रवेश पर कहा कि हम अपनी विरासतें, ज्ञान, संस्कृति तथा परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करते हैं, इस हस्तांतरण की प्रक्रिया में सबसे बहुमूल्य धरोहर है ‘भाषा’. व्यक्ति, समूह, समाज की पहचान है. प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपनी आने वाली पीढ़ी को भाषा (मातृभाषा एवं क्षेत्रीय भाषा) हस्तांतरित करें. राजभाषा हिन्दी के डिजिटलीकरण पर दृष्टिपात करें तो हमें पता चलेगा कि हिंदी भाषा ने किस प्रकार ई-कॉमर्स में अपना स्थान बना लिया है, किस तरह से ई-पत्रिकाएँ हिंदी भाषा में पूरे विश्व में प्रचलित हैं. ‘भाषा का ज्ञान’ किसी भी कार्य को करने एवं सीखने हेतु अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भाषा संयोजन या यूं कहें कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच संपर्क स्थापित करने का सशक्त माध्यम है. हम सभी ने यह देखा है कि आज से दो दशक पहले दक्षिण भारत के सिनेमा में लोगों की रूचि नहीं थी क्योंकि देश की अधिकांश आबादी को दक्षिण भारतीय भाषाओं का ज्ञान नहीं था, परंतु आज डिजिटल युग में साहित्य एवं सिनेमा के अनुवाद हो जाने की वजह से सम्पूर्ण भारत वहाँ की सिनेमा, संस्कृति और जन-जन से जुड़ चुका है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2023 के उपलक्ष्य में राजभाषा संगोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2023 के उपलक्ष्य में दिनांक 22 फरवरी, 2023 को हमारे बैंक के केंद्रीय कार्यालय, मुंबई में ‘लैंगिक समानता और नवाचार’ विषय पर महिला कार्यपालकों हेतु विशेष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री लाल सिंह, मुख्य महाप्रबंधक (मासं) ने की तथा श्री जी.एन. दास, महाप्रबंधक (मासं) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

सुश्री निर्मला डोसी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.

मुख्य अतिथि सुश्री निर्मला डोसी ने अपने संबोधन में अपने अनुभव साझा किए. इस अवसर पर उन्होंने बताया कि वर्ष 1857 में सर्वप्रथम अमेरिकी महिलाओं ने समानता हेतु आवाज़ उठाई. 28 फरवरी, 1909 को अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी की महिला सदस्यों ने अपने विरोध के स्वर को मुखर करने के लिए ‘नेशनल विमेन्स डे’ मनाने का निश्चय किया. वहीं वर्ष 1910 में कोपेनहेगन, डेनमार्क में एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत 19 मार्च, 1911 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने यह निर्णय लिया कि 8 मार्च को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को पूरे विश्व में मनाया जाएगा. उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘फेमिनिस्ट’ शब्द को भी उचित रूप से परिभाषित किया कि ‘फेमिनिस्ट’ का अर्थ हमारे समाज के दो महत्वपूर्ण स्तंभ स्त्री एवं पुरुष को समाज में समानता का स्थान दिलाने से है न कि किसी विशेष वर्ग को सशक्त बनाने व दूसरे वर्ग को दबाने से. एक बेहतर समाज के निर्माण हेतु सामाजिक संरचना में बदलाव के लिए पहल करें जिसमें कोई भी कार्य किसी लिंग से संबंधित नहीं हो बल्कि परिवार तथा समाज में हर व्यक्ति को हर कार्य में दक्ष होने की आवश्यकता है. अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित कर संगोष्ठी का समापन किया गया.