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राजभाषा संगोष्ठी-2026
“महिला विशेष हिंदी कार्यशाला” दिनांक : 07 मार्च, 2026
इस हिंदी कार्यशाला की अध्यक्षता श्री आशीष पाण्डेय, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ महोदय द्वारा की गयी एवं श्री नितेश रंजन, कार्यपालक निदेशक महोदय की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में श्री हरीश सिंह चौहान, उप निदेशक (का.) एवं कार्यालयाध्यक्ष, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, नवी मुंबई एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री चित्रा देसाई, लेखिका एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
श्री आशीष पाण्डेय, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ने कहा कि भाषा का संबंध केवल संवाद की प्रक्रिया से नहीं बल्कि राष्ट्र और उसकी सांस्कृतिक पहचान से भी गहराई से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा, “राजभाषा केवल भाषा नहीं, बल्कि अपने देश और उसकी परंपराओं के प्रति सम्मान एवं लगाव का प्रतीक है।”
कार्यक्रम में केंद्रीय कार्यालय के विभिन्न वर्टिकलों/ विभागों से 150 महिला स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
यूनियन धारा एवं यूनियन सृजन संवाददाता समीक्षा बैठक सह सम्मेलन – 2025-26
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कॉर्पोरेट गृह पत्रिकाओं “यूनियन धारा” एवं “यूनियन सृजन” के संवाददाताओं की समीक्षा बैठक सह सम्मेलन का आयोजन दिनांक 16-17 फरवरी, 2026 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में श्री आशीष पाण्डेय, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ महोदय की अध्यक्षता में किया गया। श्री सुरेश चन्द्र तेली, मुख्य महाप्रबंधक (मासं) एवं मुख्य संपादक; श्री विकास कुमार, संपादकीय सलाहकार, यूनियन सृजन एवं महाप्रबंधक (मासं एवं राभा); श्री बैजनाथ सिंह, महाप्रबंधक एवं अंचल प्रमुख, वाराणसी, श्री अम्बरीष कुमार सिंह, संपादकीय सलाहकार, यूनियन धारा एवं उप महाप्रबंधक (मासं), श्री विवेकानंद, कार्यकारी संपादक- यूनियन सृजन एवं सहायक महाप्रबंधक (राभा) उपस्थित रहे। 124 संवाददाता सहित इस कार्यक्रम में कुल 129 स्टाफ सदस्यों द्वारा प्रतिभागिता की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉर्पोरेट प्रार्थना तथा भारतीय परंपरा के अनुसरण में कार्यपालकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
प्रबंध निदेशक एवं सीईओ तथा मंचासीन कार्यपालकों के कर-कमलों द्वारा बैंक की कॉर्पोरेट गृह-पत्रिकाओं यूनियन धारा के ‘स्वर्ण जयंती अंक’ तथा यूनियन सृजन के ‘जीआई उत्पाद विशेषांक’ तथा यूनियन धारा एवं यूनियन सृजन ‘ऑनलाइन मॉड्यूल’ का विमोचन किया गया। साथ ही यूनियन सिद्धांत, ईज़ 8.0, एमएसएमई डिजिटल सहित विभिन्न विषयों पर क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित कुल 35 ई-पत्रिकाओं तथा संदर्भ-साहित्य का भी अनावरण किया गया। वर्ष 2024-25 के 06 सर्वश्रेष्ठ संवाददाताओं को ‘यूनियन स्टार संवाददाता’ पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त 25 संवाददाताओं को उत्कृष्ट योगदान हेतु ‘स्वर्ण स्टार संवाददाता’ प्रशस्ति पत्र और 20 संवाददाताओं को नियमित योगदान हेतु ‘रजत स्टार संवाददाता’ प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
राजभाषा संगोष्ठी-2025
अंचलीय ज्ञानार्जन केंद्र, गुरुग्राम में दिनांक 23 जुलाई, 2025 को “प्रभावी राजभाषा कार्यान्वयन एवं प्रचार-प्रसार हेतु उपाय” विषय पर कार्यपालकों हेतु राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री नितेश रंजन, कार्यपालक निदेशक ने की तथा श्री गिरीश चंद्र जोशी, महाप्रबंधक (मासं एवं राभा) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. सुश्री अंशुली आर्या, सचिव, भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई. भारतीय परंपरा के अनुसरण में मंचासीन कार्यपालकों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया.
इस अवसर पर बैंक के वेबसाइट के राजभाषा के नवीकृत पेज का उद्घाटन किया गया. बैंक के आंतरिक राजभाषा पोर्टल के नवीन कलेवर का भी विमोचन किया गया. इस अवसर पर अपने रोजमरा के कार्यालयी काम-काज में हिन्दी में सर्वाधिक टिप्पण लिखने वाले कार्यपालकों तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के मापदण्डों पर श्रेष्ठ राजभाषा कार्यान्वयन करने वाले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के संयोजक कार्यालयों को मंचासीन कार्यपालकों द्वारा पुरस्कृत किया गया.
राजभाषा संगोष्ठी-2024
विश्व हिंदी दिवस-2024 के उपलक्ष्य में दिनांक 24 जनवरी, 2024 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केंद्रीय कार्यालय, मुंबई में ‘पारंपरिक ज्ञान से डिजिटल क्रांति के पथ पर अग्रसर हिंदी’ विषय पर कार्यपालकों हेतु विशेष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. अतिथि वक्ता के रूप में मो. युनूस ख़ान, वरिष्ठ उद्घोषक, आकाशवाणी, मुंबई उपस्थित रहे. अपने संबोधन में संगोष्ठी के विषय प्रवेश पर कहा कि हम अपनी विरासतें, ज्ञान, संस्कृति तथा परंपराओं को पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करते हैं, इस हस्तांतरण की प्रक्रिया में सबसे बहुमूल्य धरोहर है ‘भाषा’. व्यक्ति, समूह, समाज की पहचान है. प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह अपनी आने वाली पीढ़ी को भाषा (मातृभाषा एवं क्षेत्रीय भाषा) हस्तांतरित करें. राजभाषा हिन्दी के डिजिटलीकरण पर दृष्टिपात करें तो हमें पता चलेगा कि हिंदी भाषा ने किस प्रकार ई-कॉमर्स में अपना स्थान बना लिया है, किस तरह से ई-पत्रिकाएँ हिंदी भाषा में पूरे विश्व में प्रचलित हैं. ‘भाषा का ज्ञान’ किसी भी कार्य को करने एवं सीखने हेतु अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भाषा संयोजन या यूं कहें कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच संपर्क स्थापित करने का सशक्त माध्यम है. हम सभी ने यह देखा है कि आज से दो दशक पहले दक्षिण भारत के सिनेमा में लोगों की रूचि नहीं थी क्योंकि देश की अधिकांश आबादी को दक्षिण भारतीय भाषाओं का ज्ञान नहीं था, परंतु आज डिजिटल युग में साहित्य एवं सिनेमा के अनुवाद हो जाने की वजह से सम्पूर्ण भारत वहाँ की सिनेमा, संस्कृति और जन-जन से जुड़ चुका है.
इस प्रकार कार्यपालकों हेतु आयोजित विशेष राजभाषा संगोष्ठी में विचारों के आदान -प्रदान से कार्यक्रम को सजग बनाया गया.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2023 के उपलक्ष्य में राजभाषा संगोष्ठी की संक्षिप्त रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-2023 के उपलक्ष्य में दिनांक 22 फरवरी, 2023 को हमारे बैंक के केंद्रीय कार्यालय, मुंबई में ‘लैंगिक समानता और नवाचार’ विषय पर महिला कार्यपालकों हेतु विशेष राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी की अध्यक्षता श्री लाल सिंह, मुख्य महाप्रबंधक (मासं) ने की तथा श्री जी.एन. दास, महाप्रबंधक (मासं) विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.
(श्री लाल सिंह मुख्य महाप्रबंधक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए)
सुश्री निर्मला डोसी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया.
प्रतिभागियों को संबोधित करती हुईं सुश्री निर्मला डोसी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार
मुख्य अतिथि सुश्री निर्मला डोसी ने अपने संबोधन में अपने अनुभव साझा किए. इस अवसर पर उन्होंने बताया कि वर्ष 1857 में सर्वप्रथम अमेरिकी महिलाओं ने समानता हेतु आवाज़ उठाई. 28 फरवरी, 1909 को अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी की महिला सदस्यों ने अपने विरोध के स्वर को मुखर करने के लिए ‘नेशनल विमेन्स डे’ मनाने का निश्चय किया. वहीं वर्ष 1910 में कोपेनहेगन, डेनमार्क में एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत 19 मार्च, 1911 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने यह निर्णय लिया कि 8 मार्च को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को पूरे विश्व में मनाया जाएगा. उन्होंने अपने वक्तव्य में ‘फेमिनिस्ट’ शब्द को भी उचित रूप से परिभाषित किया कि ‘फेमिनिस्ट’ का अर्थ हमारे समाज के दो महत्वपूर्ण स्तंभ स्त्री एवं पुरुष को समाज में समानता का स्थान दिलाने से है न कि किसी विशेष वर्ग को सशक्त बनाने व दूसरे वर्ग को दबाने से. एक बेहतर समाज के निर्माण हेतु सामाजिक संरचना में बदलाव के लिए पहल करें जिसमें कोई भी कार्य किसी लिंग से संबंधित नहीं हो बल्कि परिवार तथा समाज में हर व्यक्ति को हर कार्य में दक्ष होने की आवश्यकता है. अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित कर संगोष्ठी का समापन किया गया.

