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ब्याज दर स्वैप

यह एक संविदात्मक समझौता है, जिसके अंतर्गत नकद प्रवाह की एक शृंखला का आदानप्रदान किया जाता है, जिसमें नकद प्रवाह का एक हिस्सा स्थिर ब्याज दर पर आधारित होता है और दूसरा हिस्सा परिवर्तनीय ब्याज दर पर। नकद प्रवाह की गणना अनुमानित मूलधन के आधार पर की जाती है। इसमें मूलधन का वास्तविक आदानप्रदान नहीं होता है।आईआरएस फ्लोटिंग से फ्लोटिंग स्वरूप में भी हो सकता है, जहाँ दोनों पक्षों की ब्याज दरें परिवर्तनीय होती हैं।

आईआरएस का मूल उद्देश्य प्रतिभागियों को ब्याज दर जोखिम से बचाव प्रदान करना तथा उन्हें अपने-अपने नकद प्रवाह के अनुरूप आस्ति/दायित्व प्रोफ़ाइल को सर्वाधिक उपयुक्त रूप से संरचित करने में सक्षम बनाना है।

ब्याज दर स्वैप पर सहमति बनाते समय, बैंक और ग्राहक परिवर्तनीय तथा स्थिर ब्याज दरों का परस्पर लेनदेन करते हैं। ब्याज दर स्वैप के अंतर्गत, ग्राहक बैंक से अपने ऋण पर लागू परिवर्तनीय ब्याज दर प्राप्त करता है, जिसमें किसी भी प्रकार के परिवर्तनीय मार्जिन को शामिल नहीं किया जाता है, और इसके बदले वह बैंक को स्वैप अनुबंध के अनुसार एक स्थिर ब्याज दर का भुगतान करता है। यह संरचना ग्राहक को ब्याज दरों में वृद्धि के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, ग्राहक को किसी भी परिवर्तनीय मार्जिन का भुगतान करना जारी रखना होता है, और ये मार्जिन ब्याज दर स्वैप के अंतर्गत कवर नहीं होते हैं।