बचत की परिभाषा क्या है?
बचत अधिशेष धन है जो तब रहता है जब आय व्यय से अधिक होती है.
हमें पैसे क्यों बचाना चाहिए?
हमें जीवन की विभिन्न घटनाओं, जैसे शिक्षा, विवाह, घर खरीद, जन्म, बीमारी, मृत्यु तथा बुढ़ापे की आवश्यकताओं एवं आपात स्थितियों जैसे दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा आदि पर होने वाले व्यय को वहन करने में स्वयं को सक्षम बनाने के लिए नियमित रूप से पैसे बचाने चाहिए. आपात स्थिति के दौरान बचत एक बड़ी सहायता साबित हो सकती है.
हम पैसे कहां बचा सकते हैं?
हम आमतौर पर गुल्लक में घर पर पैसा रखते हैं, लेकिन यह सुरक्षित नहीं होता तथा इसका उपयोग करना भी रुचिकर नहीं होता. साथ ही घर में बचत करने वाले पैसों में वृद्धि भी नहीं होती है. इसलिए बैंक में पैसों की बचत करना बेहतर है.
हमें बैंक में पैसा क्यों बचाना चाहिए?
बैंक में बचाया गया पैसा सुरक्षित एवं भरोसेमंद है.
बैंक खाता होने के क्या फायदे हैं?
बैंक खाता खोलने से हम बचत, आवर्ती या सावधि जमा खाता खोल सकते हैं. बैंक ऋण तथा कई अन्य उपयोगी सेवाएं प्रदान करते हैं. हम अपनी मजदूरी या वेतन सीधे अपने बैंक खाते में जमा कर सकते हैं. साथ ही, मनरेगा मजदूरी, पेंशन आदि जैसे सभी सामाजिक लाभों को सीधे ईबीटी के माध्यम से बैंक खाते में जमा किया जा सकता है. हम अपनी सुविधानुसार अपने बैंक खाते में पैसे जमा कर सकते हैं या उससे निकाल सकते हैं. बैंक पैसे जमा करने के लिए कोई शुल्क नहीं लेते हैं लेकिन जमा किए गए पैसे पर ब्याज का भुगतान करते हैं. इसके अलावा, बैंक खाता होने से अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा हमारी पहचान को मान्यता मिलती है.
ब्याज की परिभाषा क्या है?
ब्याज बैंक के पास रखी गई जमा राशि पर अर्जित राशि या बैंक से पैसा उधार लेने पर भुगतान की गई राशि है. बैंक द्वारा लिया जाने वाला ब्याज साहूकार द्वारा लिए जाने वाले ब्याज से काफी कम होता है.
बीएसबीडीए की विशेषताएं क्या हैं?
एक आधारिक बचत बैंक जमा खाता(बीएसबीडीए) सरल केवाईसी मानदंडों के साथ खोला जा सकता है. चाहे कितनी ही बार पैसा जमा करें, बॅक उसके लिए शुल्क नहीं ले सकते हैं, तथा वे एक महीने में चार निकासी के लिए शुल्क नहीं लेते हैं. ग्राहक को बिना किसी शुल्क के पासबुक तथा एटीएम कार्ड प्रदान किया जाता है. खाते का उपयोग रोजमर्रा के लेनदेन जैसे जमा, निकासी, प्रेषण तथा सामाजिक लाभों को सीधे खाते में प्राप्त करने हेतु किया जा सकता है.
ओवरड्राफ्ट क्या है, तथा यह अन्य ऋणों से कैसे भिन्न है?
ओवरड्राफ्ट एक लघु ऋण की सुविधा है जो आकस्मिक विविध जरूरतों को पूरा करने के लिए बचत बैंक खाते के साथ मिलती है. खाताधारक एक छोटी राशि का लाभ उठाने हेतु अलग दस्तावेजीकरण किए बिना ओवरड्राफ्ट सीमा तक राशि निकाल सकता है. ग्राहक को ओवरड्राफ्ट राशि पर ब्याज का भुगतान करना आवश्यक है क्योंकि यह बैंक द्वारा दिया गया ऋण है. केसीसी तथा जीसीसी जैसे अन्य ऋण बैंकों द्वारा आय-सृजन गतिविधियों के विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्रदान किए जाते हैं.
नामांकन क्या है?
नामांकन एक ऐसी सुविधा है जिससे जमा धारक एक ऐसे व्यक्ति को नामित कर सकता है जो खाताधारक की मृत्यु के स्थिति में उसके बैंक खाते की राशि पर दावा कर सके. यह सलाह दी जाती है कि किसी को बैंक खाते में नामांकित करें ताकि नामांकित व्यक्ति के लिए राशि का दावा करना आसान हो सके.
नो योर कस्टमर (KYC) क्या है?
बैंकों को केवाईसी नियमों के अनुसार खाता खोलने से पहले ग्राहक के विवरण जानना आवश्यक है. आवश्यक केवाईसी दस्तावेज, जैसे कि एक तस्वीर, पहचान का प्रमाण तथा निवास का प्रमाण, खाता खोलने के फॉर्म के साथ बैंक में जमा किया जाना चाहिए. आधार कार्ड के आधार पर भी खाते खुलवाए जा सकते हैं. जिन लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, वे मनरेगा जॉब कार्ड या स्व-प्रमाणन के आधार पर आसान केवाईसी प्रक्रिया के तहत खाता खोल सकते हैं. शिथिल प्रक्रिया के तहत खोले गए खातों को छोटे खातों के रूप में माना जाएगा तथा कुछ सीमाओं के अधीन होगा.
ऋण क्या है?
ऋण संसाधनों तथा खर्चों के बीच के अंतर को भरने के लिए लिया गया उधार है. जब खर्च आय से अधिक हो जाते हैं, तथा कोई बचत नहीं होती है, तो उधार लेने का उपयोग कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है, जिससे ऋण सृजित होता है.
ऋण प्रबंधन योजना क्या है?
यह एक उपयुक्त चुकौती योजना बनाकर में उन लोगों की सहायता करने की योजना है जो वित्तीय संकट में हैं. एक परामर्शदाता ग्राहक को वित्तीय बजट को समझने तथा ऋण के बोझ को कम करने का तरीका खोजने में सहायता करेगा.
पैसे का प्रबंधन कैसे किया जा सकता है?
वित्तीय आयोजना से पैसों का कुशल प्रबंधन किया जा सकता है. वित्तीय आयोजना में पहला कदम एक निश्चित अवधि के लिए आय तथा व्यय का ट्रैक रखने के लिए अवधिवार, जैसे साप्ताहिक या मासिक, वित्तीय डायरी बनाना है.
वित्तीय आयोजना क्या है?
वित्तीय आयोजना व्यक्तियों को अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने तथा निवेश, परिसंपत्ति आवंटन, जोखिम प्रबंधन, सेवानिवृत्ति योजना आदि के माध्यम से दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुशलतापूर्वक अपने संसाधनों का उपयोग करने में मदद करती है.
वित्तीय आयोजना ग्राहकों को कैसे लाभ पहुंचाती है?
वित्तीय आयोजना ग्राहकों को अपने वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन करने, विभिन्न निवेश विकल्पों को समझने, तरलता वरीयताओं का मूल्यांकन करने, जोखिम सहन स्तर का आकलन करने तथा अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रणनीति विकसित करने में मदद कर सकती है.
बैंकों द्वारा किस प्रकार के ऋण दिए जाते हैं?
बैंक ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक ऋण, दीर्घकालिक ऋण, ओवरड्राफ्ट, कार्यशील पूंजी ऋण, कृषि तथा संबद्ध गतिविधि ऋण, व्यक्तिगत ऋण, आवास ऋण, शिक्षा ऋण तथा कारोबार ऋण सहित विभिन्न प्रकार के ऋण प्रदान करते हैं.
ऋण चुकौती क्यों महत्वपूर्ण है?
बैंक उधार देने के लिए जमाकर्ताओं के पैसे का उपयोग करते हैं, तथा उधारकर्ताओं द्वारा ऋण चुकाने में विफलता जमाकर्ताओं के पैसे तुरंत चुकाने तथा तथा अन्य उधारकर्ताओं को उधार देने की बैंक की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. यदि ऋण समय पर नहीं चुकाए जाते हैं, तो बैंक संपार्श्विक के रूप में दी गई प्रतिभूति को अपने कब्जे में ले सकते हैं तथा ब्याज सहित ऋण राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकते हैं.
एसएलबीसी क्या है?
एसएलबीसी का अर्थ राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति है, जो राज्य स्तर पर एक अंतर-संस्थागत मंच है जो बैंकिंग विकास से संबंधित मामलों पर सरकार तथा बैंकों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है. एक नामित बैंक किसी विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए संयोजक बैंक के रूप में कार्य करता है.
अग्रणी बैंक (लीड बैंक) क्या है?
देश में प्रत्येक जिले को एक विशिष्ट वाणिज्यिक बैंक को सौंपा गया है जो उस जिले के लिए अग्रणी बैंक के रूप में कार्य करता है.
बैंकों का शिकायत निवारण तंत्र क्या है?
बैंक विनियमित संस्थाएं हैं तथा उनके पास एक शिकायत निवारण अधिकारी है जिसका संपर्क विवरण सभी शाखाओं तथा उनकी वेबसाइटों पर प्रकाशित किया जाता है. यदि ग्राहकों का कोई विवाद है, तो वे उस बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं. यदि वे विवाद के समाधान से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
वित्तीय समावेशन समाज को कैसे लाभ पहुंचाता है तथा इसकी चुनौतियां क्या हैं?
वित्तीय समावेशन एक सस्ती कीमत पर कमजोर तथा अपवर्जित समूहों, जैसे कम आय वाले तथा समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की वित्तीय सेवाओं तथा ऋण तक पहुंच प्रदान करने की प्रक्रिया है. इन अपवर्जित वर्गों को बैंकिंग दायरे में लाकर, वित्तीय मध्यस्थ अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए घरों तथा व्यवसायों को आवश्यक ऋण प्रदान करके आर्थिक विकास में योगदान कर सकते हैं. हालांकि, वित्तीय समावेशन पहलों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में खराब आधारिक ढांचा तथा दूरसंचार कनेक्टिविटी, वित्तीय साक्षरता की कमी, बैंकिंग गतिविधियों के लिए आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में कठिनाई,
पारितंत्र भागीदारों के बीच सीमित प्रौद्योगिकी अंगीकरण तथा जानकारी, तथा बैंकिंग सेवाओं की मापनीयता (scalability) के लिए स्थानीय सहयोग की कमी शामिल है.
वित्तीय समावेशन पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएफआई) या संपूर्ण वित्त समावेशन (एसवीएस) क्या है?
वित्तीय समावेशन पर राष्ट्रीय मिशन या संपूर्ण वित्त समावेशन का उद्देश्य कमजोर वर्गों तथा कम आय वाले समूहों को ऋण सहित वित्तीय सेवाओं तक समय पर तथा पर्याप्त पहुंच प्रदान करना है, जिन्हें बाहर रखा गया है.
एनएमएफआई या एसवीएस मौजूदा वित्तीय समावेशन योजना से कैसे अलग है?
गांवों के कवरेज पर केंद्रित पिछली योजना के विपरीत, एनएमएफआई या एसवीएस का उद्देश्य ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवारों को कवर करना है. इसके अतिरिक्त एनएमएफआई या एसवीएस हिताधिकारियों को बैंकिंग, बीमा तथा पेंशन उत्पाद प्रदान करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण रखते हैं. इस योजना को मिशन मोड परियोजना के रूप में कार्यान्वित किए जाने का प्रस्ताव है तथा दो चरणों में छह स्तंभों के माध्यम से इसका कवरेज किया जाता है.
एनएमएफआई या एसवीएस योजना को कैसे लागू किया जाना प्रस्तावित है?
एनएमएफआई या एसवीएस योजना को मिशन मोड प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें दो चरणों में छह-स्तंभ दृष्टिकोण के माध्यम से देश के सभी अपवर्जित परिवारों को शामिल किया जाएगा. पहला चरण 15 अगस्त 2014 से 14 अगस्त 2015 तक तथा दूसरा चरण 15 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक निर्धारित है.
एनएमएफआई या एसवीएस का पहला चरण क्या प्रस्तावित करता है?
एनएमएफआई या एसवीएस के पहले चरण में बैंकिंग सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच, 5000/- रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधाओं के साथ आधारिक बैंकिंग खाते प्रदान करने, 1 लाख रुपये के इनबिल्ट दुर्घटना बीमा कवरेज के साथ रुपे डेबिट कार्ड जारी करने तथा वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव है.
एसएसए क्या है?
एसएसए का अर्थ उप सेवा क्षेत्र है, जो लीड बैंक योजना सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण का एक हिस्सा है. इस दृष्टिकोण के तहत, गांवों को उनकी निकटता तथा सन्निधि के आधार पर बैंक शाखाओं को सौंपा जाता है. एक उप सेवा क्षेत्र कई गांवों का एक समूह है जहां बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए 1000 से 1500 परिवारों को एक साथ लाया जाता है.
खोले गए खातों की विशेषताएं क्या हैं?
शून्य शेष वाले बचत बैंक खाते खोले जाएंगे तथा खाताधारक को एटीएम/डेबिट (रुपे) कार्ड जारी किए जाएंगे.
घरेलू स्तर पर आधारिक बैंकिंग खाते प्रदान करने हेतु क्या आवश्यकताएं हैं?
घरेलू स्तर पर आधारिक बैंकिंग खाते प्रदान करने के लिए, मूल केवाईसी आवश्यकताओं को पूरा करके, प्रत्येक कवर न किए गए परिवार के लिए एक खाता खोलना आवश्यक है.
क्या इन खातों पर कोई ओवरड्राफ्ट सुविधा है?
हाँ, खाते में छह महीने के संतोषजनक निष्पादन के बाद ग्राहकों (अधिमानतः महिला सदस्य को) को रु.1000/- से शुरू करके 5000/- रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा धीरे-धीरे प्रदान की जाएगी.
क्या ओवरड्राफ्ट में चूक के खिलाफ कोई गारंटी प्रदान की गई है?
1000 करोड़ रुपए की कायिक निधि से एक ऋण गारंटी निधि सृजित करने का प्रस्ताव है जिसे ओवरड्राफ्ट में चूक के सापेक्ष गारंटी प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय ऋण गारंटी निगम (एनसीजीसी) में रखा जाएगा.
खाता खोलने की गतिविधि कैसे की जाएगी?
शिविर (कैंप) मोड में सभी पात्र निवासियों के लिए खाते खोले जाएंगे. शिविर सरकार तथा बैंक अधिकारियों के समन्वय में आयोजित किए जाएंगे, तथा बीसी एजेंट तथा बैंक अधिकारी खातों को खोलना सुनिश्चित करेंगे.
क्या इन शिविरों के दौरान कोई अन्य गतिविधियाँ करने की आवश्यकता है?
इन शिविरों के दौरान आधारिक वित्तीय साक्षरता, खाता खोलने के लाभों, ऋण सुविधाओं की उपलब्धता, एटीएम कार्ड के संचालन तथा ओवरड्राफ्ट की समय पर चुकौती के लाभों पर प्रकाश डाला जा सकता है.
माइक्रो-बीमा पॉलिसी क्या है?
माइक्रो-बीमा पॉलिसी एक प्रकार का बीमा है जो समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बीच कवरेज को बढ़ावा देता है. यह एक सामान्य या जीवन बीमा पॉलिसी हो सकती है जिसमें 50,000 रुपये या उससे कम की बीमा राशि हो.
माइक्रो-बीमा पॉलिसी कौन दे सकता है?
माइक्रो-बीमा पॉलिसियों की पेशकश जीवन बीमा के साथ-साथ सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा भी की जा सकती है. गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म वित्त संस्थानों तथा बीसी के रूप में नियुक्त संस्थाओं जैसे अधिकृत तथा प्रशिक्षित मध्यस्थों, जिनमें कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कंपनियां शामिल हैं तथा जिन्हें माइक्रो - बीमा उत्पादों को बेचने के लिए भारतीय बीमा विनियामक तथा विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) द्वारा अनुमति दी गई है, उनके माध्यम से माइक्रो - बीमा पॉलिसियों की पेशकश की जा सकती है.
एनपीएस - स्वावलंबन क्या है?
एनपीएस - स्वावलंबन का अर्थ राष्ट्रीय पेंशन योजना - स्वावलंबन है, जो असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों को उनके बुढ़ापे के लिए स्वेच्छा से बचत करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 26/09/2010 को शुरू की गई एक सह-अंशदायी पेंशन योजना है.
एनपीएस - स्वावलंबन की सदस्यता कौन ले सकता है?
भारत का एक नागरिक जो असंगठित क्षेत्र से संबंधित है, निम्नलिखित शर्तों के आधार पर एनपीएस - स्वावलंबन खाता खोल सकता है: उन्हें एग्रीगेटर द्वारा अपना आवेदन जमा करने की तारीख को 18 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए, एक एग्रीगेटर द्वारा किए गए अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) प्रक्रिया का पालन करना चाहिए तथा कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, कोयला खान भविष्य निधि तथा प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम आदि जैसी किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत कवर नहीं होना चाहिए.
एक कारोबार प्रतिनिधि (बीसी) की भूमिका क्या है?
कारोबार प्रतिनिधि खुदरा एजेंट होते हैं जो बैंक शाखा या एटीएम के अलावा अन्य स्थानों पर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंकों की ओर से काम करते हैं. अनिवार्य रूप से बीसी बैंकों को अपनी पहुंच का विस्तार करने तथा कम लागत पर सीमित श्रेणी की बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं. बीसी अधिक वित्तीय समावेशन प्राप्त करने के लिए कारोबारी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
बीसी क्या कार्य करते हैं?
बीसी विभिन्न गतिविधियों करने के लिए अधिकृत हैं, जिनमें उधारकर्ताओं की पहचान करना, छोटे- मूल्य के जमा एकत्र करना, छोटे-मूल्य के ऋण का वितरण करना, मूल धन की वसूली करना या ब्याज एकत्र करना, माइक्रो-बीमा / म्यूचुअल फंड / पेंशन उत्पादों या अन्य तृतीय-पक्ष उत्पादों को बेचना, छोटे मूल्य के विप्रेषण तथा अन्य भुगतान लिखतों को प्राप्त करना तथा वितरित करना, बचत तथा अन्य उत्पादों के बारे में जागरूकता पैदा करना, धन प्रबंधन पर शिक्षा तथा सलाह प्रदान करना, तथा ऋण परामर्श देना शामिल है.
बीसी चैनल के माध्यम से किन उत्पादों तक पहुंचा जा सकता है?
बीसी चैनल उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदान करता है, जिसमें छोटे बचत खाते, सावधि जमा तथा कम न्यूनतम जमा के साथ आवर्ती जमा, किसी भी बीसी ग्राहक को प्रेषण सेवाएं, माइक्रो-क्रेडिट तथा सामान्य बीमा शामिल हैं.
बीसी के रूप में काम करने के लिए कौन पात्र है?
प्रारंभ में, केवल सोसायटी/ट्रस्ट अधिनियमों के तहत पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों/एमएफआई, पारस्परिक रूप से सहायता प्राप्त सहकारी समिति अधिनियमों या राज्यों के सहकारी समिति अधिनियमों के तहत पंजीकृत समितियों, धारा 25 कंपनियों तथा डाकघरों को बीसी के रूप में कार्य करने की अनुमति थी. हालांकि, बाद में सूची का विस्तार किया गया जिसमें सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी, सेवानिवृत्त शिक्षक, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी तथा पूर्व सैनिक, किराना/मेडिकल/उचित मूल्य की दुकानों के व्यक्तिगत मालिक, व्यक्तिगत पब्लिक कॉल ऑफिस (पीसीओ) ऑपरेटर, भारत सरकार की लघु बचत योजनाओं के एजेंट/बीमा कंपनियां, पेट्रोल पंप रखने वाले व्यक्ति, बैंकों से जुड़े अच्छी तरह से संचालित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के अधिकृत कार्यकर्ता, तथा तथा अन्य व्यक्ति, जिनमें कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित करने वाले शामिल हैं.
क्या गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को बीसी के रूप में कार्य करने की अनुमति है?
प्रारंभ में, एनबीएफसी को बीसी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति नहीं थी. तथापि, भारतीय रिजर्व बैंक ने कतिपय शर्तों के अध्यधीन गैर-जमाकर्ता एनबीएफसी (एनबीएफसी-एनडी) को बीसी के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दे दी है. इसके अंतर्गत बैंक निधियों तथा बीसी के रूप में नियुक्त एनबीएफसी-एनडी की निधियां आपस में न मिलें इसके लिए बैंक तथा एनबीएफसी-एनडी के बीच एक विशिष्ट संविदात्मक व्यवस्था, किसी भी प्रतिबंधात्मक प्रथाओं को रोकना जैसे कि केवल अपने ग्राहकों को बचत या विप्रेषण सुविधाओं की पेशकश करना तथा एनबीएफसी-एनडी तथा बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की जबरन बंडलिंग करना शामिल है.
व्यापार प्रतिनिधिओं (बीसी) के लिए कितनी दूरी की आवश्यकता है?
पहले, बीसी के प्रत्येक रिटेल आउटलेट/सब-एजेंट को आधार शाखा के रूप में नामित एक विशिष्ट बैंक शाखा की निगरानी में संलग्न किया जाना था, तथा कारोबार के स्थान तथा आधार शाखा के बीच की दूरी ग्रामीण, अर्ध-शहरी तथा शहरी क्षेत्रों में 30 किमी तथा महानगरीय केंद्रों में 5 किमी से अधिक नहीं होनी थी. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अब दूरी के मापदंड को हटा दिया है.
बीसी के लिए मुआवजे की संरचना क्या है?
बीसी के लिए पारिश्रमिक में एक निश्चित तथा परिवर्तनशील घटक होता है, जो कमीशन आधारित होता है.
बीसी मॉडल के तहत ग्राहक अपने खातों उपयोग कहां-कहां कर सकते हैं?
ग्राहक उनकी सेवा के लिए बीसी द्वारा नियुक्त बीसी एजेंटों या ग्राहक सेवा बिंदुओं, यूएसबी, कियोस्क आदि के माध्यम से अपने खातों का उपयोग कर सकते हैं.
बीसी कैसे काम करता है?
बीसी बैंकिंग लेनदेन करने के लिए सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित उपकरणों जैसे हैंडहेल्ड मशीन, स्मार्टकार्ड-आधारित उपकरण, मोबाइल फोन आदि का उपयोग करते हैं.
यदि हम अपना पैसा बीसी को जमा करते हैं तो क्या वह सुरक्षित है?
बीसी को पैसा जमा करना उतना ही सुरक्षित है जितना कि बैंक शाखा में जमा करना. आईसीटी-आधारित उपकरणों का उपयोग करके लेनदेन किए जाते हैं तथा वास्तविक समय में ऑनलाइन मोड से बैंक की बही में उनका हिसाब लगाया जाता है. ग्राहक अपने लेनदेन का तत्काल सत्यापन प्राप्त करते हैं, तथा बीसी के माध्यम से सभी लेनदेन बायोमेट्रिक्स या पिन के आधार पर किए जाते हैं, जिससे ग्राहक के खाते की सुरक्षा सुनिश्चित होती है.
डीबीटी क्या है?
डीबीटी का मतलब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर है, जो एक ऐसी योजना है जिसमें सब्सिडी को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में अंतरित करना शामिल है. आधार-सक्षम डीबीटी एक ऐसी प्रणाली है जहां आधार का उपयोग करके लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में सब्सिडी अंतरित की जाती है.
डीबीटी रोलआउट में बैंकों की क्या भूमिका है?
बैंक डीबीटी रोलआउट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. प्रत्येक हिताधिकारी के पास बैंक खाता हो, सभी लाभार्थियों को एटीएम डेबिट कार्ड जारी किए गए हों, बैंक खाते आधार से जुड़े हों, शाखा, एटीएम तथा कारोबार प्रतिनिधि एजेंटों जैसे विभिन्न एक्सेस पॉइंट्स के माध्यम से खातों से निकासी के लिए पर्याप्त बैंकिंग मूलभूत ढांचे का निर्माण हुआ हो, इन्हें सुनिश्चित करने में बैंक संबंधित सरकारी विभागों की सहायता करते हैं. बैंक संबंधित सरकारी विभागों से प्राप्त भुगतान सलाह के आधार पर हिताधिकारी के खातों में इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर भी करते हैं तथा सरकारी विभागों, यूआईडीएआई तथा एनपीसीआई सहित डीबीटी के लिए हितधारकों के साथ समन्वय करते हैं.
शाखाएं डीबीटी पोर्टल का उपयोग कैसे कर सकती हैं?
शाखाएं तथा एलडीएम http://10.4.241.103:1357/Login.aspx एक्सेस करके डीबीटी पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं. डीबीटी पोर्टल का उपयोग सीबीएस में आधार सीडिंग, एनपीसीआई मैपर पर मैपिंग की स्थिति तथा लंबित पीपीए फाइलों को प्राधिकृत करने के बारे में पूछताछ करने के लिए किया जा सकता है.
ईबीटी क्या है?
ईबीटी का मतलब इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर है, जो सरकार की एक और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना है. इस योजना के तहत, सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर नरेगा तथा एसएसपी जैसी सरकारी योजनाओं के हिताधिकारियों के लिए खाते खोले जाते हैं. ये ग्राहक इन खातों में सरकार से अपना लाभ भुगतान प्राप्त कर सकते हैं.
आधार क्या है?
आधार एक विशिष्ट पहचान संख्या है जिसमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) या राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रार (एनपीआर) द्वारा भारत के निवासियों को जारी किए गए बारह अंक शामिल हैं. अधिक जानकारी http://www.uidai.gov.in/ पर उपलब्ध है .
आधार-सक्षम बैंक खाता क्या है?
आधार-सक्षम बैंक खाता ग्राहक के आधार संख्या से जुड़ा बैंक खाता है.
क्या आधार नंबर को मौजूदा बैंक खाते से जोड़ा जा सकता है?
हां, उचित सत्यापन के बाद, आधार संख्या को आधार शाखा में खाताधारक के मौजूदा खाते (एसबी / सीए / बीएसबीडीए) से जोड़ा जा सकता है. लिंक करने के लिए, प्राथमिक खाताधारक को मूल आधार पत्र ले जाना होगा तथा शाखा को आधार पत्र की स्व-सत्यापित प्रति के साथ एक अनुरोध पत्र जमा करना होगा.
आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (एपीबीएस) क्या है?
आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (एपीबीएस) नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा दी जाने वाली एक भुगतान प्रणाली है जो आधार-लिंक्ड खातों में इंटरबैंक लेनदेन को सक्षम बनाती है.
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) क्या है?
आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) एक ऐसी प्रणाली है जो यूआईडीएआई की बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली का उपयोग करके आधार-सक्षम खातों में लेनदेन को सक्षम बनाती है. हालांकि, बैंक में खाता रखने वाले ग्राहकों से संबंधित लेनदेन (यानी, "On-us" लेनदेन) बैंक की प्रमाणीकरण प्रणाली का उपयोग करके पूरा किया जा सकता है.
एक आधार नंबर से कितने खातों को लिंक किया जा सकता है?
एक खाते से केवल एक आधार नंबर जोड़ा जा सकता है.
क्या कोई ग्राहक अपने आधार नंबर को कई बैंक खातों से लिंक कर सकता है?
हां, लेकिन आधार नंबर से जुड़े लेटेस्ट अकाउंट को ही सरकारी लाभ/सब्सिडी मिलेगी. एक बैंक में आधार नंबर को केवल एक खाते से लिंक करने की सलाह दी जाती है.
किसी खाते को आधार नंबर से लिंक करने के क्या फायदे हैं?
कई सरकारी सब्सिडी/लाभ, जैसे मनरेगा तथा एलपीजी सब्सिडी, सीधे लाभार्थी के खाते में उनके आधार नंबर के आधार पर जमा किए जाते हैं. आधार संख्या के साथ, ग्राहक अन्य बैंकों के साथ अंतःप्रचालनीय लेनदेन भी कर सकता है तथा ई-केवाईसी सेवाओं का उपयोग कर सकता है.
वित्तीय साक्षरता केंद्र (एफएलसी) का उद्देश्य क्या है?
एफएलसी का प्राथमिक लक्ष्य धन प्रबंधन के सभी पहलुओं में लोगों का मार्गदर्शन करना, उनकी वित्तीय साक्षरता में सुधार करना, उन्हें उनके वित्त पर उचित नियंत्रण हासिल करने में सहायता करना तथा मासिक वित्तीय प्रतिबद्धताओं को व्यवस्थित करना है. एफएलसी ग्राहकों को विभिन्न वित्तीय तथ्यों को समझने तथा सूचित निर्णय लेने में भी मदद करता है.
एफएलसी की क्या साख है?
एफएलसी केंद्र वित्तीय प्रबंधन सलाह की आवश्यकता वाले लोगों की मदद के लिए स्थापित किए गए हैं. केंद्र द्वारा दी जाने वाली सेवाएं नि: शुल्क तथा पूरी तरह से गोपनीय हैं. केंद्रों का प्रबंधन बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों की ओर से अनुभवी पूर्व बैंकरों द्वारा किया जाता है.
मैं एफएलसी से परामर्श कैसे प्राप्त कर सकता हूं?
ग्राहकों को एफएलसी पर जाने, डेटा फॉर्म भरने तथा परामर्शदाता द्वारा सुझाए गए आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी जमा करने की आवश्यकता है. काउंसलर व्यक्तिगत परामर्श सत्रों के लिए पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि तथा समय निर्धारित करेगा. अधिकांश सलाह तुरंत दी जाती है.
परामर्श सत्र के दौरान क्या होता है?
परामर्श सत्र ग्राहकों को अपने वित्त के प्रबंधन के लिए एक उपयुक्त समाधान समझने तथा तैयार करने में मदद करेगा. यदि ग्राहक कर्ज में है, तो परामर्शदाता योजना पर विचार करने के लिए ग्राहक के बैंकर से संपर्क करके सहायता प्रदान कर सकता है. यदि यह बैंकर द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों में फिट बैठता है, तो यह ग्राहक को आगे की कार्रवाई, दंडात्मक ब्याज आदि से बचा सकता है.
क्या कार्यक्रम निःशुल्क है?
क्या परामर्श गोपनीय है?
हां, परामर्शदाता ग्राहक की वित्तीय स्थिति को किसी को भी नहीं बताएगा.
क्या एफएलसी ऋण प्रदान करता है?
नहीं, केंद्र वित्तीय स्वतंत्रता पर केवल मार्गदर्शन प्रदान करता है.
क्या कॉल सेंटर ऋण चुकौती एकत्र करता है तथा उन्हें मेरे बैंकरों को देता है?